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पहली बार ग्‍लोबल इंडेक्‍स में जुड़ा भारतीय बॉन्ड, जानिए क्या है इसका मतलब और ये कैसे है आपके काम की खबर

पहली बार ग्‍लोबल इंडेक्‍स में जुड़ा भारतीय बॉन्ड, जानिए क्या है इसका मतलब और ये कैसे है आपके काम की खबर
Indian Bonds In Globle Index- ग्‍लोबल इंडेक्‍स में शामिल होने से पहले ही भारतीय बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेश साल 2023 के पहले छह महीनों के मुकाबले इस साल चार गुना बढ चुका है.

भारत सरकार की तरफ से जारी होने वाले बॉन्ड (IGB) को जेपी मॉर्गन के उभरते बाजार बॉन्ड इंडेक्स में शुक्रवार को शामिल किया गया. भारत सरकार के बॉन्ड को 28 जून, 2024 से 31 मार्च, 2025 तक 10 महीनों की अवधि के लिए जेपी मॉर्गन के उभरते बाजार सूचकांक में शामिल किया जाएगा.

ग्‍लोबल इंडेक्‍स में जुड़ने से भारतीय बॉन्ड में 2 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्‍त का निवेश होने की उम्‍मीद है. इससे भारत सरकार की उधारी जुटाने की लागत में कमी आएगी और विकास कार्यों के लिए सरकार के खजाने में ज्‍यादा पैसा आएगा. साथ ही लोन सस्‍ता हो सकता है और रुपये में भी मजबूती आ सकती है.

इंडियाबॉन्ड्स डॉट कॉम के सह-संस्थापक विशाल गोयनका ने कहा कि जेपी मॉर्गन सूचकांक में भारतीय सरकारी बॉन्ड (आईजीबी) को शामिल करना भारत में निश्चित आय वाले बाजारों के लिए एक ऐतिहासिक पल है. शुरुआती निवेश 25-30 अरब डॉलर का होना चाहिए लेकिन इस सूचकांक का हिस्सा बनने से अगले कुछ वर्षों में इस संख्या के बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है.

पिछले कुछ वर्षों में रूस या चीन जैसे देशों में निवेश की अनिच्छा होने के कारण वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों में पूंजी लगाने का मौका तलाश रहे हैं, लिहाजा इस सूचकांक को शामिल करने का समय भी लगभग सही है.

चार गुना बढ़ा भारतीय बॉन्ड में निवेश

ग्‍लोबल इंडेक्‍स में शामिल होने से पहले ही भारतीय बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेश साल 2023 के पहले छह महीनों के मुकाबले इस साल चार गुना बढ चुका है. 2024 में जून तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में 66,762 करोड़ रुपये लगा चुके हैं. साल 2023 में इस अवधि में केवल 17525 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था.

ये होगा फायदा

गोल्‍डमैन सॉक्‍स के विश्‍लेषकों का कहना है कि ग्‍लोबल इंडेक्‍स से जुड़ने से भारतीय बांड बाजार में हर महीने औसतन 25 हजार करोड रुपये का निवेश होगा.

जेपी मॉर्गन के इंडेक्‍स रिसर्च हेड ग्‍लोरिया किम का मानना है कि वैश्विक सूचकांक में शामिल होने से भारतीय बॉन्ड बाजार में 2 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्‍त विदेशी निवेश आकर्षित हो सकता है. एक साल में भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की हिस्‍सेदारी 2.4 फीसदी से बढ़कर 4.4 फीसदी हो सकती है.

भारत सरकार को एक साल में बॉन्ड बिक्री से 2.50 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्‍मीद है. इससे उद्योगों के लिए अधिक घरेलू पूंजी उपल्‍ब्‍ध हो जाएगी.

ब्‍याज दरों में कमी आ सकती है, जो सरकार और कंपनियों के लिए उधारी को सस्‍ता बना सकती है. विदेशी निवेश में बढ़ोतरी से रुपये को सपोर्ट मिल सकता है और आने वाले दिनों में इसमें मजबूती देखते को मिल सकती है.